विद्यार्थियों-शोधार्थियों के लिए जरूरी किताब
प्रभात रंजन, चर्चित लेखक एवँ जानकी पुल के मॉडरेटर: अरविंद दास मुझे कॉफ़ी पिलाने का वादा कई साल से भले पूरा न कर पाए हों लेकिन किताब लिखने के मामले में वे ज़रूर नियमित हैं। उनकी पिछली किताब ‘ बेख़ुदी में खोया शहर: एक पत्रकार के नोट्स ’ की स्मृति अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थी कि उनकी नई किताब हाथ में आ गई- ‘ मीडिया का मानचित्र ’ । सबसे पहली बात कि यह किताब अधिक फ़ोकस्ड है। ख़ासकर प्रिंट मीडिया को लेकर। किताब का पहला ही लेख 21 वीं सदी में हिंदी के अख़बार ’ में उन्होंने यह विस्तार से बताया है कि जिस दौर में उन्नत समझे जाने वाले समाजों में प्रिंट मीडिया के प्रसार में गिरावट आ रही है उसी दौर में हिंदी अख़बारों की प्रसार संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। इसके कारणों को उन्होंने बहुत अच्छी तरह सोदाहरण समझाया है। इस लम्बे लेख में वे यह बताना भी नहीं भूले हैं हिंदी अख़बार सत्ता की मुखर आलोचना से बचते हैं , यथास्थिति के पोषक हैं। इसी तरह ’ हिंदी पत्रकारिता की भाषा का विकास ’ लेख मीडिया के सभी विद्यार्थियों-शोधार्थियों को पढ़ना चाहिए। इस लेख में उन्होंने उदाहरण के साथ उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में ...
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